जबलपुर से संतोष जैन व इंद्रजीत कोष्टा की रिपोर्ट -
अन्नदाता के पसीने का सौदा 244 करोड़ के घाटे में कर रही सरकार
मंगाई दो लाख 13 टन गेहूं की निविदा
जबलपुर वर्ष 2019 में समर्थन मूल्य पर खरीदा गया था गेहूं
एक और सरकार आर्थिक तंगी की आड़ में गरीबों को राशन का अनाज तक तरीके से नहीं दे पा रही है वहीं दूसरी ओर किसानों से 2019-20 में समर्थन मूल्य पर खरीदा गया 200000 टन गेहूं औने पौने दामों पर बेचने जा रही है हैरानी की बात यह है कि इस गेहूं को बेचने के लिए आमंत्रित निविदा में रिजर्व प्राइस 1580 रुपए के प्रति कुंटल नियत की गई जबकि गेहूं खरीद में रखरखाव तक 2 सालों में सरकार को करीब ₹500 प्रति कुंटल पड़ा इस लिहाज से सरकार को इस सौदे में सीधा-सीधा 244 करोड रुपए तक का घाटा सरकार का एक कुंटल पर लगा 28 राज्य सरकार ने 2019 में केंद्र सरकार के सहयोग से प्रदेश के किसानों से 18 सो ₹75 प्रति कुंतल की दर से खरीदा था इस गेहूं में राज्य के हिस्से में करीब 2013 टन गेहूं को बेचने के लिए सरकार ने स्टेट सिविल सप्लाई कारपोरेशन के जरिए यह निविदा निकाली है यह गेहूं प्रदेश के अलग-अलग जिलों के विभिन्न गोदामों में स्टाक है.

