जबलपुर से बृजनंदन गोस्वामी व रुचि शर्मा की रिपोर्ट -
माला देवी की प्रतिमा की आभा का दिन भर में 3 बार बदलता है रंग
गढ़ा पुरवा में स्थित है मंदिर रानी दुर्गावती के वंशजों ने की थी स्थापना
बस्ती में विराजी मां महालक्ष्मी का अवतार
कलचुरी काल की प्रतिमा
भक्तों की लगती है कतार
रहस्य बना रंग बदलना
पंचमी पर भगवती त्रिपुर सुंदरी का हुआ मनोहारी श्रृंगार
गढा स्थित माता माला देवी की प्राचीनतम मंदिर में स्थापित देवी की प्रतिमा दिन में तीन बार अपने आप रंग बदलती है इसका रहस्य आज तक सुलझ नहीं पाया और पुरातत्व विद इसे पत्थर की विशेषता से जोड़कर देखते हैं वही श्रद्धालु इसे देवी मां का प्रताप और चमत्कार मानते हैं इतिहासकार मानते हैं कि गोंडवाना साम्राज्य सामाक्षी रानी दुर्गावती के वंशजों ने इसकी स्थापना की थी दोनों नवरात्रि में पूजन के लिए यहा कतार लगती है बस्ती में विराजी मां गल,ा में गढ़ा में पुरवा चुंगी चौकी पुरवा झंडा चौक के समीप बखरी क्षेत्र में यह माता का यह मंदिर स्थित है वैसे तो यह प्रतिमा पुरातत्व विभाग द्वारा संरक्षित है लेकिन सभी कुछ कागजों पर चल रहा है देख रेख कोई नहीं करता
महालक्ष्मी का अवतार
इतिहासविद आनंद सिंह राणा ने बताया कि माला देवी रानी दुर्गावती के वंशजों की कुलदेवी है रानी स्वयं रोज यहां पूजन करने के लिए आती थी माला देवी को महालक्ष्मी देवी का ही एक रूप माना गया है
कलचुरी काल की प्रतिमा
इतिहासकारों के अनुसार बाला देवी की प्रतिमा कलचुरी काल गोंड काल के पहले मैं बनी है कलचुरी वंश के बाद गोंडवाना काल आया
रहस्य बना रंग बदलना
मूर्ति के रंग बदलने का रहस्य आज भी पहेली बना हुआ है
भक्तों की लगती है कतार
चैत्र नवरात्रि पर माला देवी मंदिर में भक्तों की कतार लग रही है सुबह से ही जल चढ़ाने का क्रम शुरू हो जाता है
पंचमी पर भगवती त्रिपुर सुंदरी का हुआ मनोहारी श्रृंगार


