भोपाल से संतोष जैन अंकित श्रीवास्तव की रिपोर्ट
भोपाल भोपाल में एक हफ्ते का कोरोना-कर्फ्यू लगाते हुए शिवराज सरकार द्वारा गृह-विभाग की कोरोना गाइडलाइन में गैर-अधिमान्यता पत्रकारों को न्यूज़ कवरेज़ करने पर पाबंदी लगाना ये लोकतंत्र के चौथे स्तंभ पर हमला करने जैसा हैं शिवराज सरकार के इस फैसले ने अधिमान्य और गैर-अधिमान्य पत्रकारों में फ़र्क़ पैदा कर दिया हैं
पत्रकार अधिमान्य हो या गैर-अधिमान्य, पत्रकार सिर्फ पत्रकार कहलाता हैं लेकिन मध्यप्रदेश की शिवराज सरकार पत्रकारों में भेदभाव और पक्षपात कर रही हैं। सरकार का इस तरह पत्रकारों में भेदभाव करना सही नही हैं। शिवराज सरकार को ये सोचना चाहिए कि अधिमान्य पत्रकार अपने न्यूज़ रूम में अपने ऑफिस में बैठकर कार्य करते हैं जबकि गैर-अधिमान्य पत्रकार फील्ड में कार्य करते हैं सर्दी में, बारिश में, गर्मी में और कड़ी धूप में निकलकर न्यूज़ इकठ्ठा करते हैं और लोगो से रूबरू होकर उनकी परेशानियों को सरकार तक पहुंचाते हैं और सरकार के बेहतरीन सामाजिक कार्य से जनता को अवगत कराते हैं और सरकार की नाकामियों और भ्र्ष्टाचार का काला चिठ्ठा भी जनता के सामने बेबाक तरीके से खोलते हैं। लेकिन इस कोरोना कर्फ्यू में सरकार की गाइडलाइन में गैर-अधिमान्य पत्रकारों पर न्यूज़ कवरेज़ करने की पाबंदी लगाकर शिवराज सरकार ने पत्रकारों का मनोबल और हिम्मत तोड़ने की कोशिश की है ये गैर-अधिमान्य पत्रकारों के साथ अन्याय हैं।
मध्यप्रदेश की शिवराज सरकार जल्द ही कोरोना गाइडलाइन में संशोधन करें और गैर-अधिमान्य पत्रकारों को भी न्यूज़ कवरेज़ करने की आज़ादी दे, वरना पत्रकार अपने-आपको ठगा सा महसूस करने लगेंगे और शायद वो इस पेशे को छोड़ भी देंगे, ऐसा अनुमान हैं।

