भोपाल से संतोष जैन इंद्रजीत कोष्टा की रिपोर्ट -
भोपाल न्यूज:- मध्यप्रदेश शासकीय महाविद्यालयीन जनभागीदारी कर्मचारी संघ के प्रदेश मीडिया प्रभारी हितेश गुरगेला ने जानकारी देते हुए बताया कि मध्यप्रदेश के उच्च शिक्षा विभाग के विशेष कर्तव्यस्थ अधिकारी डॉ. राकेश श्रीवास्तव ने Covid-19 वेक्सिनेशन से संबंधित जानकारी ऑनलाइन दर्ज करने के संबंध में एक पत्र जारी किया है जिस पर मध्यप्रदेश शासकीय महाविद्यालीन जनभागीदारी कर्मचारी संघ के प्रांतीय सचिव त्रिलोक जाटव ने मुख्यमंत्री शिवराज सरकार को आड़े हाथ लेते हुए ट्वीट किया है कि मध्यप्रदेश उच्च शिक्षा विभाग के विशेष कर्तव्यस्थ अधिकारी डॉ. राकेश श्रीवास्तव द्वारा Covid-19 वेक्सिनेशन से संबंधित जानकारी ऑनलाइन दर्ज करने के निर्देश जारी किए हैं किंतु संबधित अधिकारी ने दुर्भावनावश जनभागीदारी सहित अन्य मदो से कार्यरत कर्मचारियों का पत्र में उल्लेख नहीं किया है। जिस कारण शासकीय महाविद्यालयो के प्राचार्य गण इन कर्मचारियों की जानकारी ऑनलाइन दर्ज नहीं करेंगे। ऐसी भयावह कोरोना जैसी महामारी के समय शासकीय महाविद्यालयो में जनभागीदारी सहित अन्य मदो से कार्यरत कर्मचारियो के साथ डॉ. राकेश श्रीवास्तव का सौतेला व्यवहार अमानवीय है जिससे प्रदेश के कर्मचारियों में रोष व्याप्त है।
गौरतलब है कि प्रदेश के शासकीय महाविद्यालयो में जनभागीदारी सहित अन्य मदो से कई वर्षों से कार्य कर रहे कर्मचारियों पर स्वय विभाग के अधिकारी ही सौतेला व्यवहार करते आ रहे है इसका ताजा मामला देखने मे आया है कि विभाग द्वारा एक पत्र जारी किया गया जिसमें शासकीय महाविद्यालयो के प्राचार्य/ प्रभारी प्राचार्य, शिक्षकों, ग्रंथपाल, क्रीड़ाअधिकारी, तृतीय एव चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी, अतिथि विद्वानों की कोविड वेक्सिनेशन की जानकारी चाही गयी है किंतु कई वर्षों से न्यूनतम पारिश्रमिक से भी कम पर व ईपीएफ कटोत्रा न होने पर भी कार्य कर रहे जनभागीदारी सहित अन्य मदो से कार्यरत कर्मचारियो को इससे अछूता रखा जा रहा है जबकि प्रदेश के शासकीय महाविद्यालयों में कार्यं कर रहे जनभागीदारी कर्मचारी कोविड-19 जैसी भयंकर महामारी में अपनी सेवाएं दे रहे है ऐसे में प्रश्न यह उठता है कि प्रदेश के मुखिया शिवराज सिंह चौहान कर्मचारी हितैषी योजनाओं से कर्मचारियों को लाभानिवत करना चाहते है लेकिन डॉ राकेश श्रीवास्तव जैसे अधिकारी मुख्यमंत्री शिवराज के आदेशों की धज्जियां उड़ाते हुए सरकार की छवि खराब कर रहे है अब देखना यह है कि क्या मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ऐसे अधिकारियों पर शिकंजा कसेंगे या इसी प्रकार जनभागीदारी सहित अन्य मदो से कार्यरत कर्मचारियो से सौतेला व्यवहार होता रहेगा।

