मनीष गर्ग विशेष संवाददाता सतना -
जैसा कि आप सभी को अवगत कराया गया था कि विगत दिनांक 31.03.2021 को भालचन्द्र यादव निवासी ग्राम पड़वनिया थाना मझगवां सतना म०प्र० की उत्तर प्रदेश पुलिस व यू.पी. एस.टी.एफ. ने मुठभेड के नाम पर निर्मम कर दी थी और नियम विरुद्ध बिना परिजनों के पुलिस द्वारा परिजनों को शव नहीं दिया जा रहा था और मृतक को परिजनों के बिना ही अन्तिम संस्कार करने में लगे थे चूंकि यह ग्राम पंचायत पडवनिया मेरे विधानसभा क्षेत्र में
आती है, और इसलिए मौके में पहुंचकर परिजनों को शव दिलवाया और शव की हालत देखकर ऐसा प्रतीत हुआ कि मृतक के साथ बर्बरता की की गई फिर उसकी निर्मम हत्या की गई, शरीर के उपरी भाग ही नही शरीर के प्राइवेट भाग में भी गम्भीर चोटे थी. परिजनों की व्यथा एवं तराई के गांवों में पुलिस की इस कार्यवाही के बाद फैले इस फर्जी एनकाउण्टर की दहशत से लोगों में भय व्याप्त हो गया जिससे लोग पलायन की बात करने लगे।
इसके बाद आखिरकार मैने मृतक भालचन्द्र यादव के बारे में जानकारी ली एवं दस्तावेज एकत्रित करना शुरू किया, इसी दौरान मुझे यह जानकारी भी प्राप्त हुई कि मृतक भालचन्द्र की पत्नी घटना की एफ.आई.आर दर्ज करवाने के लिए लगातार भटकती रही लेकिन उसकी एफ. आईआर दर्ज नहीं की गई। पुलिस द्वारा की गई इस घटना से भालचन्द्र के गांव एवं आसपास के क्षेत्रों में भय एवं दहशत का माहौल व्याप्त है, चूंकि उक्त सम्पूर्ण घटनाक्रम मेरे विधानसभा क्षेत्र एवं विधानसभा के लगे उत्तर प्रदेश से सम्बन्धित है, पुलिस द्वारा की गई इस कायराना हरकत के चलते लोगों के साथ साथ में भी दुखी एवं स्तब्ध था जिसके बाद मैंने 09. 04.2021 को माननीय उच्चतम न्यायालय के समक्ष एक जनहित याचिका सी.बीई.आई जांच के लिए दायर की।
परन्तु कोरोनी वैश्विक माहामारी के चलते माननीय न्यायमूर्ति की पीठ उपलब्ध नहीं हो पाई है इसके लिए मैने 7 बार Urgent Monitering के द्वारा माननीय उच्चतम न्यायालय से प्रार्थन भी की यह बहुत ही संवेदनशील प्रकरण है। अत: इस याचिका को जल्द से जल्द सुनवाई हरे हर सम्भव प्रयास करने के बाद यह याचिका 01.07.2021 की माननीय उच्चतम न्यायालय में क्रमांक 31 court number. मैं लगी है।
माननीय उच्चतम न्यायालय ने शुरुवात में ही सुनवाई के दौरान मौखिक रूप से कहा कि बहुत ही गम्भीर विषय है।
इसमें माननीय उच्चतम न्यायालय ने यह प्रस्तावित किया कि याची को पहले माननीय उच्च न्यायालय के समझ न्याय की प्रार्थना करनी चाहिए तब उच्चतम न्यायालय आये तो बेहतर होता माननीय उच्चतम न्यायालय की इस इच्छा का सम्मान करते हुए मैनें माननीय उच्च न्यायालय इलाहाबाद में जनहित याचिका दायर की।
इस सन्दर्भ में यह भी बताना उपयुक्त होगा कि माननीय उच्चतम न्यायालय ने तथ्य को भी संज्ञान में लिया है यह अपराध मध्य प्रदेश तथा उत्तर प्रदेश दोनों राज्यों के क्षेत्राधिकार
में हुआ है तथा याची दोनों राज्यों की उच्च न्यायालय में से किसी एक में फिर से याचिका दायर कर सकता है अतः माननीय उच्चतम न्यायालय ने याची से पूछा कि वह किस उच्च न्यायालय जाना चाहेगा चूंकि इस अपराध में उत्तर प्रदेश पुलिस और यूपी एस.टी.एफ. मुख्य
किरदार में है. अतः मैने माननीय उच्च न्यायालय इलाहाबाद के समक्ष याचिका डालने का निर्णय लिया
जिस पर माननीय उच्चतम न्यायालय ने मुझे माननीय उच्च न्यायालय इलाहाबाद के समक्ष याचिका डालने का निर्देश किया था।
इसी सन्दर्भ में माननीय उच्चतम न्यायालय ने यह भी अवलोकित किया कि याची माननीय उच्च न्यायालय इलाहाबाद में याचिका प्रस्तुत करे तो माननीय उच्च न्यायालय उसका शीघ्र से शीघ्र निस्तारण करे। उपर्युक्त याचिका में मैने मृतक भालचन्द्र की पत्नी को भी माननीय उच्चतम न्यायालय में
वीडियो कान्फ्रेंसिंग के माध्यम से उपस्थिति कराया था ताकि उस महिला की व्यथा तथा
उत्पीडन माननीय न्यायालय के समक्ष सीधे तौर पर प्रस्तुत किया जा सके। कल दिनांक 12.07.2021 सोमवार को मैने माननीय उच्च न्यायालय इलाहाबाद के समक्ष याचिका दायर कर दी है।
मेरा माननीय उच्च न्यायालय से बस यही अनुरोध है कि भालचन्द्र यादव के हत्यारों के खिलाफ जल्द से जल्द एवं कड़ी से कड़ी सजा सुनवाई जाए जिससे की मेरे विधानसभा क्षेत्र ही नहीं अपितु तराई एवं अन्य पिछड़े क्षेत्रों पर जहां कुछ पुलिस कर्मियों की धरता चलते पुलिस की छवि खराब हुई पुनः प्रतिष्ठित हो सके और आम जनता अपने आप को सुरक्षित महसूस करते हुये जनता पुलिस उर्व कानून के प्रति विश्वास कायम रहे।

